Uttra news
क्यों देना पड़ा आख़िर नगर पंचायत गंगोलीहाट के अकाउंटेंट को इस्तीफ़ा ? :::::::
 

 

15जुलाई 2021-


गंगोलीहाट नगर पंचायत में उपनल के ज़रिए तैनात एक अकाउंटेंट को अपनी नौकरी से इस्तीफ़ा देना पड़ा है. जिस दौर में नौकरियों का त्राहिमाम हो उस दौर में किसी युवा को नौकरी छोड़नी पड़े तो ख़ुद ही समझा जा सकता है कि कितनी मज़बूरी में उसने यह क़दम उठाया होगा..

जिस दिन यह कर्मचारी नौकरी से त्यागपत्र देकर गंगोलीहाट शहर को छोड़कर जा रहा था, उस दिन ही मुझे इस ख़बर के बारे में पता चल गया था.. क्योंकि मैं गंगोलीहाट में नहीं रहता, इसलिए मैंने कुछ ज़रूरी व्यक्तियों से इसकी पुष्टि के लिए संपर्क किया था लेकिन किसी को इसकी कोई ख़बर नहीं थी, वहज शायद यह रही हो कि वह अकाउंटेंट आउटसाइडर था और शहर में उसका दायरा ज़्यादा ना रहा हो.. मैंने ख़ुद उससे सम्पर्क की कोशिश की लेकिन संभव नहीं हो पाया..

यही वजह रही कि मैंने अब तक इसे लेकर कोई सार्वजनिक पोस्ट नहीं की..  

लेकिन कल मुझे ख़ुद पीड़ित व्यक्ति ने कॉल किया था. उसने बताया कि किस तरह गंगोलीहाट नगर पंचायत में चल रही वित्तीय अनियमितताओं और अकाउंट्स डिपार्टमेंट् से जबरदस्ती पास कराए जा रहे जा रहे ग़ैरवाज़िब बिलों को साइन नहीं करने के चलते उसे नगर पंचायत के अधिकारी-पदाधिकारियों की ओर से ज़बरदस्त तरीक़े से धमकाया गया था.. 

एक अस्थाई कर्मचारी को मिली तमाम तरह की धमकियों के चलते आख़िरकार उसे इस्तीफ़ा दे देना पड़ा.. उसने मुझे बताया कि वह उस पर दबाव डाल रहे ताक़तवर लोगों के ख़िलाफ़ कुछ नहीं कर सकता था.. और ग़ैरवाजिब काम करने को ना ही उसका ज़मीर इजाज़त दे रहा था और ऐसा करके भी ऑडिट के समय अन्तत: उस पर ही गाज गिरती.. उसे मालूम था कि अनियमितताएँ उद्घाटित होने पर एक अस्थाई कर्मचारी ही सबसे आसान शिकार होगा.. 

इस तरह के तनावों से घिर कर उसकी पढ़ाई भी बाधित हो रही थी जिसे लेकर वह ज़्यादा गम्भीर था.. और उसने आख़िरकार इस्तीफ़ा देने का फ़ैसला किया..

हालॉंकि उसने मुझे कहा कि ''मेरा नाम नहीं आए.. पता नहीं वे अब भी क्या कर दें..सब कुछ उनके ही हाथों में है..'' 

हालॉंकि नाम तो अब भी मैंने पोस्ट में नहीं लिखा है लेकिन उसका ज़िक्र आए बग़ैर ये कहानी कैसे कही जा सकती है? 

मेरी इस पोस्ट का मक़सद एक ऐसी घटना को उद्घाटित करना है जिस पर गंगोलीहाट के लोगों का अब तक ध्यान नहीं गया है और जो अन्तत: उनसे और उनके भविष्य से ही जुड़ी है.. 

मुझे मालूम है इस घटनाक्रम पर एक मुक़म्मल रिपोर्ट बनाने में क़ाफ़ी मेहनत और वक़्त की ज़रूरत है लेकिन अभी सिर्फ उतना जितना मुझे पता है.. 

वह इसलिए कि गंगोलीहाट के सुधी जन, सत्ता पक्ष-विपक्ष, पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता इसका संज्ञान लें और ख़बर की खुदाई कर असलियत सामने लाएँ.. 

हो सकता है कि सच उससे इतर हो जो फ़ौरी तौर पर नज़र आ रहा है लेकिन अगर एक ईमानदार कर्मचारी को इस तरह दबाव में नौकरी छोड़नी पड़ रही है तो क्या सब को ख़ामोश बैठे रहना चाहिए..? 

अगर ऐसा हुआ तो यह एक मरे हुए समाज का लक्षण है.. जिसकी सड़ांध कम से कम जीवित लोगों के नथुनों को लगनी ही चाहिए.. और उनका आक्रोश भी दर्ज होना ही चाहिए..

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नोट: गंगोलीहाट नगर पंचायत में अभी उस पार्टी की हुक़ूमत है जिसका सुप्रीम लीडर ब्रह्माण्ड का अब तक का सबसे ईमानदार नेता है..

  "पत्रकार रोहित जोशी फेसबुक पेज से साभार "

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