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रेडक्रास दिवस- युवा कवि मनी नमन ने लिखा रेडक्रास गीत(Red cross song), खूब की जा रही है पसंद
Red cross song
 
रेडक्रास दिवस- युवा कवि मनी नमन ने लिखा रेडक्रास गीत(Red cross song), खूब की जा रही है पसंद

अल्मोड़ा के युवा कवि मनी नमन ने रेडक्रास गीत(Red cross song) लिखा है जिसे खूब पसंद किया जा रहा है।

अल्मोड़ा, 08 मई 2021- अल्मोड़ा के युवा कवि मनी नमन ने रेडक्रास गीत(Red cross song) लिखा है जिसे खूब पसंद किया जा रहा है।

विश्व को शांति सद्भाव और परोपकार का पाठ पढ़ाने वाले महापुरुष सर हेनरी ड्यूनांट का जन्मदिन 8 मई को विश्व रेडक्रॉस दिवस के रूप में मनाया जाता है।

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विश्व मे शांति स्थापित करना, आपदा,बाढ़,महामारी में रेडक्रॉस की अहम भूमिका होती है। आज कोरोनकाल में भी रेडक्रॉस सोसाइटी भारत सहित पूरे विश्व में तत्परता से परोपकार का कार्य कर रही है।

युवा कवि मनी नमन ने रेडक्रॉस गीत (Red cross song)लिखा है,जिसे संगीतकार राम सागर ने कम्पोज़ किया और इसे मशहूर टीवी अदाकारा रूप दुर्गापाल सहित अनेक लोगों ने अपनी आवाज़ दी है।

मनी नमन ने कहा है, कि वे इस रेडक्रॉस गीत(Red cross song) को कोरोना काल में दिवंगत हुए सभी लोगों और वर्तमान में इससे लड़ने में सहयोग करने वाले हर एक व्यक्ति को समर्पित करते हैं।

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रेडक्रॉस गीत के लिए उन्हें रेडक्रॉस के प्रदेश महासचिव एमएस अंसारी,जिलाधिकारी अल्मोड़ा नितिन सिंह भदौरिया, चेयरमैन रेडक्रॉस किशन गुरुरानी, संरक्षक,प्रकाश चन्द्र जोशी, डॉ जेसी दुर्गापाल, प्रसिद्ध अंतराष्ट्रीय कवि अशोक चक्रधर सहित दर्जनों लोगों ने शुभकामनाएं दी हैं।

यह है मनी नमन का लिखा गीत—–

रेडक्रास दिवस- युवा कवि मनी नमन ने लिखा रेडक्रास गीत(Red cross song), खूब की जा रही है पसंद

“करूणा,परहित,प्रेम,समर्पण जीवन का आधार बनें
हम सबके अपने हो जाएं सब अपना परिवार बनें,

किसी खास के लिए कभी क्या चन्दा खिड़की पर आया,
कभी सुना है वृृक्षों ने खुद ही अपने फल को खाया।
जीवन में यदि परसेवा का भाव नहीं मन मे आया
तो फिर खुद से पूछ रे मानुष क्या खोया है क्या पाया?
जन्म पशु भी लेते हैं पर हम कोई अवतार बनें,
हम सबके अपने हो जाएं सब अपना परिवार बनें
करुणा परहित प्रेम समर्पण……

परपीड़ा का रहे ध्यान और परसेवा हो कर्म यही,
दया शांति सौहार्द सिखाए मानवता का धर्म यही,
सबको अपने साथ चलाना,सबको गले लगाना है
हर घर का चूल्हा सुलगे नित ऐसा लक्ष्य बनाना है
जो बेबस असहाय पड़े हैं हम उनका अधिकार बनें,
हम सबके अपने हो जाएं सब अपना परिवार बनें,

करुणा परहित प्रेम समर्पण……

घोर तप्त हैं जो उनको अपने कारण कुछ छाव मिले
दूर मलिनता हो मन से सबको साधन सद्भाव मिले
बाढ़, आपदा, रक्तदान, परसेवा में श्रमदान करें,
यह कारज प्रभु ने सौंपा है हम इस पर अभिमान करें।
खुद ही नाव चलाएं असहायों की खुद पतवार बनें,
हम सबके अपने हो जाएं सब अपना परिवार बनें
करुणा परहित प्रेम समर्पण……”

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