भारत में पब्लिक ट्रांसपोर्ट का चेहरा बदलने वाला है। भारतीय रेलवे, वंदे भारत और नमो भारत जैसी सेमी हाई-स्पीड ट्रेनों के बाद अब सुपर हाई-स्पीड हाइपरलूप ट्रेन की ओर कदम बढ़ा रहा है। अगर सबकुछ योजना के मुताबिक चला, तो आने वाले समय में दिल्ली से पटना की 1,040 किलोमीटर की दूरी महज 1 घंटे में तय की जा सकेगी, जबकि दिल्ली से हरिद्वार मात्र 20 मिनट में पहुंचा जा सकेगा।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में IIT मद्रास में एशिया की सबसे लंबी हाइपरलूप टेस्टिंग फैसिलिटी का दौरा किया। उन्होंने बताया कि यह 410 मीटर लंबा हाइपरलूप टेस्ट ट्यूब जल्द ही दुनिया का सबसे लंबा टेस्ट ट्रैक बन सकता है। हाइपरलूप की सफलता भारत में ट्रांसपोर्ट सिस्टम को पूरी तरह बदलकर रख देगी।
हाइपरलूप एक अल्ट्रा-हाई-स्पीड ट्रांसपोर्ट सिस्टम है, जिसमें वैक्यूम-सील ट्यूब के अंदर कैप्सूल या पॉड्स चलाए जाते हैं। इन पॉड्स को इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फोर्स से ज़मीन के ऊपर तैरते हुए चलाया जाता है, जिससे यह 1,000 किमी प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार पकड़ सकती है।
हाइपरलूप टेक्नोलॉजी की अवधारणा पहली बार 2013 में इलॉन मस्क ने दुनिया के सामने रखी थी। इसके बाद 9 नवंबर 2020 को अमेरिका के लास वेगास में 500 मीटर लंबे ट्रैक पर पहली हाइपरलूप टेस्टिंग हुई थी।
अब भारत भी इस तकनीक पर तेजी से काम कर रहा है, और जल्द ही देश का पहला हाइपरलूप रेल ट्रैक तैयार कर लिया जाएगा। इसके बाद ट्रेन का ट्रायल शुरू किया जाएगा, जिससे यात्रा के समय में जबरदस्त कमी आएगी और परिवहन की दुनिया में क्रांतिकारी बदलाव आएगा।