Mahashivratri 2025: इस महाशिवरात्रि जरूर करें यह तीन उपाय, भोलेनाथ होंगे प्रसन्न, दूर होगी बाधाएं

महाशिवरात्रि सनातन धर्म में एक प्रमुख पर्व माना जाता है। इसे भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह उत्सव के रूप में मनाया जाता है।…

Mahashivratri 2025: Do these three remedies on this Mahashivratri

महाशिवरात्रि सनातन धर्म में एक प्रमुख पर्व माना जाता है। इसे भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह उत्सव के रूप में मनाया जाता है। ये पर्व फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आता है। इस दिन भक्त उपवास रखते हैं और रात्रि जागरण भी करते हैं और विशेष रूप से चार पहरों में भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं।

ऐसा माना जाता है कि इस दिन की गई शिवजी से उपासना समस्त बाधाओ को दूर करती है और सुख समृद्धि देती है। महाशिवरात्रि 2025 26 फरवरी को मनाई जा रही है। इस दिन भगवान प्रसन्न होते हैं। इसके लिए कुछ विशेष उपाय बताए गए हैं जिनका धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है।

इस दिन भगवान शिव की पूजा और उपासना करने से व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि आती है और कष्टों का निवारण होता है। बेलपत्र अर्पण, भांग और दूध से अभिषेक तथा रुद्राक्ष धारण करने जैसे उपाय भक्तों को भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने में सहायक होते हैं।

भगवान शिव को प्रसन्न करने के तीन विशेष उपाय

  1. बेलपत्र अर्पित करें
    महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव को तीन पत्तों वाला 108 बेलपत्र अर्पित करना चाहिए। इसे विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इसे अर्पित करने से भगवान व्यक्ति के जीवन के नकारात्मकता को समाप्त कर देते हैं। बेलपत्र अर्पित करते समय ओम नमः शिवाय का जाप करना चाहिए।

1.भांग और दूध से अभिषेक करें

    भगवान शिव को भांग, दूध, दही, घी और शहद अर्पित करने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। विशेष रूप से भांग को दूध में मिलाकर शिवलिंग पर अर्पित करने से जीवन में सुख-समृद्धि का संचार होता है। यह भी माना जाता है कि इस उपाय से मानसिक शांति प्राप्त होती है और व्यक्ति के जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।

    1. रुद्राक्ष धारण करें और घर में स्थापित करें

    सनातन धर्म रुद्राक्ष का भी विशेष महत्व है।ये भगवान शिव का ही स्वरूप माना जाता है। शिवरात्रि से पहले यदि कोई व्यक्ति रुद्राक्ष को अपने घर में स्थापित करता है या धारण करता है तो उसके जीवन से रोग, दोष और दुख समाप्त हो जाते हैं। यह आध्यात्मिक उन्नति और मानसिक शांति के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

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