Uttarakhandi Lok Gayak Heera Singh Rana Ka Nidhan
उत्तराखण्ड के प्रख्यात लोक गायक हीरा सिंह राणा (Lok Gayak Heera Singh Rana) का निधन हो गया है। अपने सुरों से लोगों के दिलों पर राज करने वाले हीरा सिंह राणा ने विनोद नगर दिल्ली में अंतिम सांस ली।
लोक गायक हीरा सिंह राणा (Lok Gayak Heera Singh Rana) को दिल्ली सरकार ने गढ़वाली,कुमाऊॅंनी और जौनसारी भाषा अकादमी का उपाध्यक्ष बनाया गया था। रात 2:30 बजे अचानक दिल का दौरा पढ़ने से 2:30 बजे उनका निधन हो गया।
1942 में ङढोली गांव में नारंगी देवी व मोहन सिंह राणा के घर में जन्मे लोक गायक हीरा सिंह राणा (Lok Gayak Heera Singh Rana) ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पहाड़ से ही की। और इंटर की परीक्षा उन्होने दिल्ली से पास करने के बाद वह स्कॉलरशिप लेकर कोलकाता चले गये जहां गीत एंव नाटय प्रभाग में 1965 से उन्होने अपने कैरियर की शुरूवात की। उनके गीत आकाशवाणी नजीबाबाद लखनऊ और गोरखपुर से प्रकाशित हुए। गंभीर किंतु अर्थपूर्ण गीत लाखो लोगों की जुबान पर बरबस आ ही जाते है।
उत्तराखंडी लोक संगीत को देश और दुनिया तक पहुंचाने में उनका बड़ा योगदान हैै। अपनी लोक गायकी के शुरुआती दिनों से ही हीरा सिंह राणा के गीतों से उनकी ख्याति दूर-दूर तक पहुंच गई उनके गीतों को लोग आज भी गुनगुनाते हैं। अपने कालजयी गीतों “आँख तेरी काई काई, आई हाई हाई रे मिजाता” और “अज काल हरे बना, मेरी नौली पराणा” के माध्यम से हीरा सिंह राणा हमेशा जिंदा रहेंगे।