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बुरे फंसे हरीश रावत, अब गुरूद्वारे में झाड़ू लगाकर करेंगे प्रायश्चित
 
 

एक बयान देकर बुरे फंसे हरीश रावत अब गुरूद्वारे में सेवा कर इसका प्रायश्चित करेंगे। दरअसल पंजाब में कांग्रेस के प्रभारी और उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री हरीश रावत के पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धू और 4 कार्यकारी अध्यक्षों को पंज प्यारे की संज्ञा दिये जाने से इतना बबाल मचा कि उन्हे इसके लिये मांफी मांगनी पड़ी। 

सिख धर्म में यह माना जाता है कि जब गुरु गोविंद सिंह ने सिख धर्म शुरू किया था जो उन्होंने थी 5 प्यारों यानि 5 लोगों को चुना था। यह 5 प्यारें जो गुरु और धर्म के लिए कुछ भी कर सके, धर्म के लिए अपनी जान भी न्यौछावर कर देते हों। इसके बाद से यह एक पंरपरा बन गई कि जब भी सिखों की कोई भी यात्रा, कीर्तन या कोई भी धार्मिक कार्यक्रम हो जहां श्री गुरु ग्रंथ साहिब को ले जाया जाना हो तो वहां पर 'पंज प्यारे'नेतृत्व करते है। 


 पंजाब में कांग्रेस के प्रभारी हरीश रावत ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू और उनके चार अध्यक्ष  की तुलना पांच प्यारों से कर दी। फिर क्या था विपक्षी अकाली दल को बैठे बिठाये मुद्दा मिल गया। पूर्व मंत्री और शिरोमणि अकाली दल प्रवक्ता दलजीत सिंह चीमा ने कांग्रेस नेताओं की तुलना पंच प्यारे से करने पर आपत्ति जताते हुए हरीश रावत से अपने शब्दों को वापस लेने और सिख संगत से माफी मांगने की मांग कर डाली साथ ही राज्य सरकार से रावत के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग भी की। 

बयान के बाद बचे बबाल के बाद कांग्रेस के पंजाब प्रभारी, उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री और ऑल इंडिया कांग्रेस कमिटी (AICC) के महासचिव हरीश रावत ने अपने बयान पर माफी मांग कर मामले को शांत करने का प्रयास किया है।

रावत ने अपने फेसबुक पेज पर 'पंज प्यारे' टिप्पणी के लिए मांफी मांगते हुए लिखा कि,कभी आप आदर व्यक्त करते हुये, कुछ ऐसे शब्दों का उपयोग कर देते हैं जो आपत्तिजनक होते हैं। मुझसे भी कल अपने माननीय अध्यक्ष व चार कार्यकारी अध्यक्षों के लिए पंज प्यारे शब्द का उपयोग करने की गलती हुई है। मैं देश के इतिहास का विद्यार्थी हूंँ और पंज प्यारों के अग्रणी स्थान की किसी और से तुलना नहीं की जा सकती है। मुझसे ये गलती हुई है, मैं लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए क्षमा प्रार्थी हूँ। मैं प्रायश्चित स्वरूप अपने राज्य के किसी गुरुद्वारे में कुछ देर झाड़ू लगाकर सफाई करूंगा। मैं सिख धर्म और उसकी महान परंपराओं के प्रति हमेशा समर्पित भाव और आदर भाव रखता रहा हूँ। मैंने चंपावत जिले में स्थित श्री रीठा साहब के मीठे-रीठे, देश के राष्ट्रपति से लेकर, न जाने कितने लोगों को प्रसाद स्वरूप पहुंचाने का काम किया है। जब मुख्यमंत्री बना तो श्री नानकमत्ता साहब और रीठा साहब, जहां दोनों स्थानों पर श्री गुरु नानक देव जी पधारे थे, सड़क से जोड़ने का काम किया। हिमालयी सुनामी के दौर में हेमकुंड साहिब यात्रा सुचारू रूप से चल सके, वहां मेरे कार्यकाल में हुये काम को आज भी देखा जा सकता है। समय कुछ और मिल गया होता तो घंगरिया से हेमकुंड साहब के मार्ग तक रोपवे का निर्माण भी प्रारंभ कर दिया होता। मैं पुनः आदर सूचक शब्द समझकर उपयोग किये गये अपने शब्द के लिये मैं सबसे क्षमा चाहता हूँ।''


 

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