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पिथौरागढ़ की चौदास घाटी में कृषकों की आजीविका वृद्धि एवं उच्च हिमालयी औषधीय पादपों के संरक्षण कार्यशाला आयोजित
 
 

पिथौरागढ़, 30 अगस्त 2021- जी.बी. पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान, कोसी, कटारमल अल्मोडा द्वारा राष्ट्रीय हिमालयी अध्ययन मिषन के तहत पिथौरागढ़ जिले के सीमावती चौदास घाटी में तीन दिवसीय (26-28 अगस्त 2021) जडी बूटी कृषिकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया।

 जिसके तहत क्षेत्रीय किसानों को जड़ी बूटी की महत्ता कृषिकरण तकनीकों, पंजीकरण विधियों, सरकारी परियोजनाओं, बाजारीकरण आदि मुख्य बिन्दुओं पर जानकारी प्रदान की गई। 
उपरोक्त कार्यशाला में परियोजना वैज्ञानिक डॉ. आईडी भट्ट द्वारा क्षेत्रीय किसानों से को संदेष प्रषित किया गया, जिसमें डॉ. भट्ट ने समस्त क्षेत्रीय वासियों को अधिक से अधिक मात्रा में उच्च हिमालयी जड़ी बूटीयों के कृषिकरण हेतु मिषन से जुड़ने तथा भविष्य में उत्पादित सामाग्री हेतु बाजार कराने का विष्वास दिलाया। 
उन्होंने बताया कि वर्तमान में चौदास घाटी के कृषक वन हल्दी, सम्यो, कूट, कटकी आदि की वृहत खेती कर रहे है। जो कि भविष्य में घाटी के समुदायों की आजीविका वृद्धि में सहायक सिद्ध होंगे इस तीन दिवसीय कार्यषाला का आयोजन  नारायण आश्रम, नियांग एवं पाली में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ ग्राम प्रधान सोसा श्रीमती सुरेखा देवी द्वारा किया गया। उन्होंने समस्त क्षेत्र वासीयो को जैव विविधता संरक्षण, जडी बूटी कृषिकरण बाजार आदि आवष्यकताओं पर जानकारी देते हुए बताया कि वें स्वतः ही वन हल्दी, सम्यों खेती कर रही है जो कि भविष्य में उनकी आजीविका वृद्धि में सहायक होंगी। कार्यषाला में डॉ. अमित बहुखण्डी द्वारा कृषकों को पंजीकरण हेतु दस्तावेजीकरण, कृषक रिकार्ड, भारत एवं उत्तराखण्ड सरकार द्वारा कियान्वित परियोजनाओं, जड़ी बूटी कृषिकरण हेतु सब्सिडी आदि बहुमूल्य विषयों पर लाभकारी जानकारी साझा की गयी। 
साथ ही उन्होने बताया कि परियोजना के तहत चौदास घाटी में सम्यों के उत्पादन एवं कृषकों के लाभ हेतु संस्थान द्वारा क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया, नई दिल्ली से बी.सी.एस. एम. पी. स्कीम के तहत अनुबंध  किया गया है।
 जिसमें क्षेत्रीय किसानों को कलस्टर कृषि के तहत पंजीकरण एवं गुड एग्रीकल्चर प्रेक्टिस का प्रषिक्षण दिया जाऐगा ताकि वे भविष्य में अपनी उत्पादित उच्च गुणवत्ता वाली जड़ी बूटी को राष्ट्रीय एवं अर्न्तराष्ट्रीय बाजार में आसानी से विक्रय का सके।

 इसी क्रम में ग्राम नियांग, पाली एवं सोसा के 10 कृषकों द्वारा सम्यो प्रजाति का कृषिकरण प्रारम्भ हुआ। कार्यपाला के तहत क्षेत्रीय किसान बहादुर सिंह, दिवान सिंह, नेत्र सिंह, केदार सिंह, प्रेम राम, ममता देवी, वीनिता आदि को सम्यो के लगभग 50000 पाँध निःषुल्क वितरित किये गये। साथ ही कुलदीप जोषी द्वारा कृषकों को सम्यो की खेती हेतु प्रशिक्षण, खेत तैयार करना, पाँध रोपण विधि, नर्सरी प्रबंधन, बीज एकत्रण आदि पर प्रषिक्षण एवं ज्ञान प्रदान किया गया। कार्यशाला का संचालन ‍ हेमन्त सिंह गर्ग्याल,  लक्ष्मण सिंह मर्तोलिया द्वारा किया गया। कार्यवाला में 40 कृषकों ने प्रतिभाग किया एवं श्री नारायण आश्रम में तैयार उच्च हिमालयी जड़ी बूटी नर्सरी पालीहाउस आदि का भ्रमण कर जानकारी प्राप्त की।

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