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कृषिभूमि में किए गए संशोधनों को तत्काल निरस्त करे सरकार
 उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी द्वारा आयोजित एक संगोष्ठी में त्रिवेंद्र सरकार द्वारा तीन वर्ष पहले कृषि भूमि की असीमित ख़रीद की  छूट तथा कृषि भूमि के गैर कृषि उपयोग के अंतर्गत जमीन्दारी अधिनियम की धारा 143 में किये गए संसोधनों को तत्काल निरस्त करने की मांग प्रदेश सरकार से गई।
 

भटेलिया मुक्तेश्वर(नैनीताल),20 अगस्त 2021— उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी द्वारा आयोजित एक संगोष्ठी में त्रिवेंद्र सरकार द्वारा तीन वर्ष पहले कृषि भूमि की असीमित ख़रीद की  छूट तथा कृषि भूमि के गैर कृषि उपयोग के अंतर्गत जमीन्दारी अधिनियम की धारा 143 में किये गए संसोधनों को तत्काल निरस्त करने की मांग प्रदेश सरकार से गई।

इस मौके पर तमाम क्षेत्रों से आए लोगों ने प्रदेश सरकार से उत्तराखंड की विधानसभा में उत्तराखंडी अस्मिता की रक्षा के लिए राज्य को संवैधानिक ‌प्रावधान (अनुच्छेद 371) के अन्तर्गत संरक्षण देने हेतु केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजने की भी मांग की।

पर्वतीय क्षेत्रों में सशक्त भू कानून की तेज़ होती मांग के बीच उपपा द्वारा भटलिया में आयोजित संगोष्ठी में इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की गई की पर्वतीय क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों की खुली एवं ज़मीनों की अंधाधुंध ख़रीद फरोख्त कब्जाने के कारण मध्य हिमालय की विशिष्ट भौगोलिक रचना अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। जिसके लिए सरकारों की नीतियां व 21 वर्षों से उत्तराखंड की सत्ता में काबिल लोग ज़िम्मेदार हैं।

संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए उपपा के केंद्रीय अध्यक्ष पी.सी. तिवारी ने कहा कि राज्य बनने के बाद दिल्ली व अपने केंद्रीय नेतृत्व के इशारे पर काम करने वाले राजनैतिक दलों सरकारों ने इस समृद्ध राज्य की खेती किसानी को नष्ट कर इसे पलायन, विस्थापन व बेरोजगारी का दंश दिया है जिसके खिलाफ़ राज्य की जनता में भारी आक्रोश है। जिसके लिए राज्य की अस्मिता की रक्षा के लिए एक सशक्त राजनैतिक आंदोलन की ज़रूरत है।

संगोष्ठी को संबोधित करते हुए वन पंचायत संघर्ष मोर्चा के तरुण जोशी ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में खेती के लिए 5 प्रतिशत से कम ज़मीन उपलब्ध है।इसे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने भूमि बंदोबस्त  ओर चकबंदी की व्यवस्था की वकालत की।

उन्होंने कहा कि बेनाप के नाम पर जो 15 प्रतिशत ज़मीन यहां पर मौजूद है उसे किसानी के लिए उपलब्ध कराना ख़ाली होते गांवों में उग आए जंगलों को डीम्ड फॉरेस्ट में लाने के ख़तरों पर भी सचेत होने की ज़रूरत है।

संगोष्ठी में कुमाऊं वाणी के संचालक मोहन कार्की ने कहा की ज़मीनों पर पूंजीपतियों के कब्जे हमारी सांस्कृतिक विरासत को भी गहरे ज़ख्म दे रहे हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता क्षेत्र के जाने माने सामाजिक कार्यकर्ता खीम सिंह नयाल तथा संचालन करते हुए उपपा के प्रकाश उनियाल ने अपनी कविताओं द्वारा उत्तराखंड की जनता से अपनी समस्याओं को लेकर आगे आने का आह्वान किया।

संगोष्ठी में जुगल मनराल, शशि उनियाल, गोपाल लोधियाल, जगदीश नयाल, राकेश नयाल, मोहन सिंह बिष्ट, राजेन्द्र बिष्ट, शिक्षाविद पुष्कर, नैनीताल के दिनेश उपाध्याय के साथ चौखुटा, भवाली, परबड़ा, गहना, सुंदर खाल, लोटा, सुनकिया , लेटिबूंगा तथा अन्य क्षेत्रों के लोग मौजूद रहे।संगोष्ठी के समापन पर आयोजकों की ओर से पीयूष भाई ने सभी का आभार व्यक्त किया। जिसके बाद क्षेत्र में हुई बैठक में भू माफियाओं के मुकाबले व जनता को गोलबद्ध करने के लिए क्षेत्रीय स्तर पर उपपा के एक सात सदस्यीय संयोजक मंडल का गठन किया गया। 

जिसमें पीयूष कुमार, पवन ढैला, गोपाल लोधियाल, तुलसी, पंकज भट्ट, जगदीश नयाल, प्रकाश उनियाल शामिल हैं।इस संयोजक मंडल को ज़रूरतों के हिसाब से आवश्यक सांगठनिक फ़ैसले लेने का अधिकार प्रदान किया गया।

 

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