सिर्फ एक ब्लड टेस्ट से पता चलेगा मौत का कारण! वैज्ञानिकों ने किया चौंकाने वाला खुलासा

अब एक साधारण रक्त परीक्षण यह पता लगा सकता है कि किसी व्यक्ति को भविष्य में कैंसर, डिमेंशिया या अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा कितना…

Just a blood test will reveal the cause of death! Scientists made a shocking revelation

अब एक साधारण रक्त परीक्षण यह पता लगा सकता है कि किसी व्यक्ति को भविष्य में कैंसर, डिमेंशिया या अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा कितना अधिक है। यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (UCL) के शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में पाया कि शरीर के विभिन्न अंग अलग-अलग गति से बूढ़े होते हैं, और यही प्रक्रिया किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डाल सकती है।

शोधकर्ताओं के अनुसार, जो अंग अपेक्षा से अधिक तेज़ी से उम्रदराज होते हैं, वे भविष्य में संबंधित बीमारियों के खतरे को बढ़ा सकते हैं। उदाहरण के लिए, यदि किसी व्यक्ति का हृदय सामान्य से अधिक तेज़ी से बूढ़ा हो रहा है, तो उसमें हृदय रोगों का जोखिम बहुत बढ़ जाता है। इसी तरह, जिन लोगों के फेफड़े अधिक तेजी से उम्रदराज हो रहे हैं, उनमें श्वसन संक्रमण, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) और फेफड़ों के कैंसर की संभावना अधिक होती है।

सबसे चौंकाने वाली खोज यह रही कि डिमेंशिया का सबसे अधिक खतरा उन लोगों में पाया गया जिनकी प्रतिरक्षा प्रणाली तेजी से बूढ़ी हो रही थी, न कि उन लोगों में जिनका मस्तिष्क मध्यम आयु में अधिक तेजी से बूढ़ा हो रहा था। वैज्ञानिकों ने इस खोज को पहले के उन अध्ययनों से जोड़ा है, जिनमें पाया गया था कि गंभीर संक्रमणों से जूझने वाले लोगों में बाद के जीवन में डिमेंशिया का खतरा बढ़ जाता है।

इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने 20 वर्षों तक लोगों की सेहत का विश्लेषण किया और पाया कि यह रक्त परीक्षण 30 अलग-अलग बीमारियों के जोखिम की भविष्यवाणी कर सकता है। यह न केवल किसी विशेष अंग से जुड़ी संभावित समस्याओं को उजागर करता है, बल्कि यह भी बताता है कि शरीर का कोई एक हिस्सा बाकी अंगों के स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित कर सकता है।

यह शोध स्वास्थ्य विज्ञान के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, क्योंकि इसके जरिए डॉक्टर पहले से ही संभावित गंभीर बीमारियों की पहचान कर सकते हैं और मरीज को समय रहते सही दिशा में इलाज दे सकते हैं। अगर यह तकनीक बड़े पैमाने पर विकसित होती है, तो भविष्य में गंभीर बीमारियों की रोकथाम और इलाज में क्रांतिकारी बदलाव आ सकता है।

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