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bring migrants from Mumbai to Uttarakhand, court asks for answer from state government

नैनीताल। लॉक डाउन के कारण महाराष्ट्र के मुंबई व इसके आसपास इलाकों में फंसे उत्तराखण्ड के प्रवासियों (migrants) को उनके गृह क्षेत्र लाने का मामला अब हाईकोर्ट पहुंच गया है। हाईकोर्ट ने इस मामले में उत्तराखण्ड सरकार और रेलवे को 17 जून तक जबाब दाखिल करने को कहा है। इस मामले में 18 जून को सुनवाई होगी।

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गौरतलब है कि कोविड महामारी के कारण उत्तराखण्ड के प्रवासी (migrants) कई जगहों पर फंसे हुए है। मुंबई और इसके आसपास के क्षेत्रों में फंसे लोगों को उनके घरो में सकुशल पहुंचाने के लिये प्रवासी सहायता टीम की संयोजक श्वेता मासीवाल ने अब हाईकोर्ट में गुहार लगाई है।

श्वेता मासीवाल ने बताया कि इन लोगो ने राज्य सरकार द्वारा दिये गये पोर्टल के लिंक पर भी रजिस्टेशन कराया है। और वह लगातार राज्य सरकार से उत्तराखण्ड के प्रवासियो को उनके घर पहुंचाने की मांग कर रही है। श्वेता मासीवाल का आरोप है कि उत्तराखण्ड की सरकार इस मामले में गंभीर नही है और सरकार के इसी रवैये के कारण उन्हे हाईकोर्ट में याचिका दायर करनी पड़ी।

इस मामले में याचिकाकर्ता के अधिवक्ता व हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत मैनाली ने बताया कि मुंबई और आसपास के इलाकों में में प्रवासी (migrants) फंसे हुए है और प्रवासी सहायती टीम ने 6000 लोगों की लिस्ट सरकार को अप्रैल में दी थी। इसके बाद दो ट्रेन सरकार की ओर से और एक ट्रेन सामाजिक मदद से कराई गई थी। इसके बावजूद 2600 के आसपास लोग अभी भी फंसे हुए है।

और सरकार से बार बार प्रवासी (migrants) सहायता टीम इसके लिये अनुरोध कर रही है लेकिन सरकार ने इस पर कोई गौर नही किया। महाराष्ट्र की सरकार से अनुरोध किया गया जिसके बाद 5 जून को महाराष्ट्र की सरकार ने उत्तराखण्ड सरकार को पत्र लिखकर कहा कि हम इनको भिजवाने के लिये राजी है और राज्य सरकार इनके लिये विशेष ट्रेन की व्यवस्था करें।

महाराष्ट्र सरकार ने इन लोगों को नजदीकी रेलवे स्टेशन पहुंचाने के लिये ट्रासंपोर्ट सुविधा दिलाने पर भी हामी भरी है। रेलवे ने भी राज्य सरकार से एनओसी आने के बाद ही ट्रेन लगाने की बात कही है। अधिवक्ता मैनाली ने बताया कि फंसे प्रवासी (migrants) बहुत ही खराब हालत में रह रहे है लोगों की जॉब छूट गई है और उनके पास रेंट देने के लिये भी पैसा नही और लोग पार्क में तक रह रहे है।


मामले में हाईकोर्ट ने उत्तराखण्ड सरकार और रेलवे को 17 जून तक जबाद दाखिल करने को कहा है और मामले की अगली सुनवाई 18 जून नियत की गई है।

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