हल्द्वानी(Haldwani)- उपपा की बैठक -आओ मिलें जुलें बदलें

Haldwani

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Haldwani – Uppa’s meeting, come and change

कश्मीर के केसर को भाई उत्तराखंड की आबोहवा|| saffron in uttrakhand||

हल्द्वानी, 28 नवंबर 2020- उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी द्वारा Haldwani में आयोजित गोष्ठी उत्तराखंड के बीस साल में क्षेत्रीय अस्मिता एवं विकल्प के सवाल पर चर्चा की गई|

आयोजित गोष्ठी में वक्ताओं की एकराय रही कि सभी प्रश्नों का समाधान राजनीतिक है इसलिए बिना राजनीतिक हस्तक्षेप से क्षेत्रीय अस्मिता को नहीं बचाया जा सकता है। इसके लिए क्षेत्रीय राजनैतिक पार्टियों को एकजुट होकर समाधान करना होगा। ‘आज हिमाल तुमको धध्यूंछौ, जागो जागो मेरो लाल’ से हुई (Haldwani)
नगर निगम सभागार में उपपा के केन्द्रीय अध्यक्ष पी.सी तिवारी की अध्यक्षता एवं उपाध्यक्ष व राज्य आंदोलनकारी के संचालन में सम्पन्न गोष्ठी की शुरूआत ‘घिरे हैं हम सवाल से, हमें जवाब चाहिए’ व ‘आज हिमाल तुमको धत्यूंछौ’ जागो जागो मेरो लाल जनगीत से हुई।

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गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए पीसी तिवारी ने कहा कि उपपा द्वारा ‘आओ मिले जुले बदले’ कार्यक्रम के तहत प्रदेश की जनता छात्र, व्यापारी, कर्मचारी, महिला मजदूर बुद्धिजीवियों संगठनों के प्रतिनिधियों सहित संवाद कर उत्तराखंड की अस्मिता को बचाने के लिए एकजुट होकर आगे आने की अपील कर रहे हैं तथा क्षेत्रीय राजनीतिक संगठनों से बातचीत कर रहे हैं तथा क्षेत्रीय राजनीतिक विकल्प को मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
स्वतंत्र पत्रकार इस्लाम हुसैन ने अपने सम्बोधन में कहा कि उत्तराखंड की अस्मिता को बचाने के साथ साथ देश की विविधता व लोकतंत्र को भी बचाने की जरूरत है। स्थानीय मुद्दों एवं संस्कृति को बचाने के लिए सतत संघर्ष जारी रखने की जरूरत है।
आधाशिला के संपादक दिवाकर भट्ट ने अपने सम्बोधन में कहा कि सत्ता में बैठे जनप्रतिनिधियों का सवालों से बचना खतरनाक है।

जनता का यह अधिकार है कि उन्हें उनके सवालों का जवाब मिले। भट्ट ने कहा कि दिल्ली से आ रही हवा और राजनीति दोनों ही प्रदूषित हैं जो उत्तराखंड के पर्यावरण एवं राजनीति को नुकसान पहुंचा रहे हैं। महिला अधिकारों के लिए काम करने वाली हीरा जंगपांगी ने आज महिलाओं के कानूनी अधिकारों की बात करना, उनके लिए आवाज उठाने पर सरकार प्रशासन के जरिए मुकदमा दर्ज खर रही है।

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तराई के वंचित समुदाय थारू, बोक्सा व वनराजि जाति के लोगों को को मिलने वाले अधिकार नहीं मिल पा रहे हैं।
‌प्रांतीय उघोग व्यापार के अध्यक्ष नवीन चन्द्र वर्मा ने कहा कि राज्य गठन के बीस वर्षों में राज्य की परिकल्पना को पूरी तरह खत्म कर दिया है। इन बीस वर्षों में सत्ता पर काबिज पार्टियों ने विकास की उल्टी गंगा बहाई।

कहा कि हिमालयी क्षेत्रों से विकास की गंगा बहाने के बजाय तराई से जौ विकास की जो योजनाऐं बनाई वे योजनाऐं पहाड़ों की जड़ पर आकर ही दम तोड़ गई हैं।उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय पार्टियों का न उभरना उत्तराखंड के लिए दुर्भाग्यपूर्ण रहा।(Haldwani)
यूकेडी(डेमोक्रेटिक) के वरूण तिवारी ने कहा कि जो समाज अपनी अस्मिता व संस्कृति को सहेज कर नहीं रख पाता है वह समाज चिरायू नहीं रह पाता है।उन्होंने कहा कि सभी क्षेत्रीय पार्टियों को एकजुट होने की आवश्यकता है।
महिला नेत्री जानकी रैंगाई ने कहा कि जंगली जानवरों का शिकार बन रही महिलाओं का दर्द समझने के लिए किसी राजनैतिक दलों के पास समय नहीं हैं।


गंगागिरी गोस्वामी ने पहाड़ों को रेल नेटवर्क से जोड़ने पर जोर दिया और टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन के लिए बजट अवमुक्त करने की मांग उठाई।(Haldwani)


गोष्ठी को रेखा धस्माना,आनंदी वर्मा,मतलूब अहमद,मोहन राम,लालमणि,सुरेश उनियाल,मोहन बिष्ट,सुनील कांडपाल,प्रकाश उनियाल,प्रियंका सिंह ने भी अपने विचार रखे।
बैठक में बी.डी फुलारा, नंदा वल्लभ तिवारी, सुनील पर्नवाल, जय प्रकाश पांडे, राजूगिरि, चतर सिंह, बिशन दत्त सनवाल, राहुल जोशी, त्रिवेन्द्र जोशी, किरन, अशोक पंत, गोपाल राम आदि उपस्थित रहे। (Haldwani)

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