हरिद्वार जिले में पूर्व विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। पहले गणतंत्र दिवस के दिन खानपुर विधायक उमेश कुमार के साथ हुए टकराव और फायरिंग मामले में वह सुर्खियों में थे, अब अस्पताल में इलाज के दौरान उनके व्यवहार को लेकर नया विवाद सामने आया है। जिला अस्पताल के स्वास्थ्य कर्मियों ने उन पर अशोभनीय शब्दों का प्रयोग करने का आरोप लगाया है, जिससे अस्पताल प्रशासन और चैंपियन के बीच तनातनी बढ़ गई है।
पूर्व विधायक वर्तमान में कोर्ट अभिरक्षा में जिला अस्पताल में भर्ती हैं, लेकिन इस दौरान अस्पताल के स्टाफ से उनकी कथित बदसलूकी का मामला सामने आया है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि चैंपियन ने कुछ पुरुष कर्मचारियों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया, जबकि स्टाफ नर्सों ने भी उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। इस विवाद के बीच उनकी पत्नी रानी देवयानी ने मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाया है।
रानी देवयानी ने राज्य मानवाधिकार आयोग में याचिका दायर कर अपने पति की मेडिकल फाइल तलब करने और अस्पताल प्रशासन की भूमिका की जांच करने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन उनके पति की स्थिति को गलत तरीके से पेश कर रहा है। याचिका में डॉ. विकासदीप पर भी आरोप लगाया गया कि उन्होंने प्रेस के सामने बिना ठोस आधार के चैंपियन को स्वस्थ घोषित कर दिया।
गणतंत्र दिवस पर खानपुर विधायक उमेश कुमार और कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन के बीच बढ़ते विवाद ने हिंसक रूप ले लिया था। 25 जनवरी को सोशल मीडिया पर विवादित पोस्ट के बाद खानपुर विधायक उमेश कुमार लाइसेंसी पिस्टल लेकर चैंपियन के रुड़की स्थित आवासीय कार्यालय पहुंचे थे। अगले दिन चैंपियन और उनके समर्थकों ने खानपुर विधायक के कार्यालय में घुसकर मारपीट और फायरिंग की थी, जिसके बाद उनके खिलाफ हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज किया गया था।
हालांकि, पुलिस जांच के बाद अब उन पर दर्ज हत्या के प्रयास की धारा को गैर इरादतन हत्या के प्रयास में बदल दिया गया है। पुलिस ने घटनास्थल के वीडियो फुटेज खंगालने के बाद यह निर्णय लिया, जिससे अब चैंपियन को कानूनी राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है।
इस मामले में खानपुर विधायक उमेश कुमार को पहले ही जमानत मिल गई थी, लेकिन चैंपियन को जेल जाना पड़ा था। जेल में तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां से अब उनके व्यवहार को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। पुलिस की ओर से दर्ज धाराओं में बदलाव होने के बाद अब यह देखना होगा कि उन्हें कानूनी प्रक्रिया में जल्द राहत मिलती है