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संजय चौहान, छोई, रामनगर (नैनीताल)
दादी और माँ नें लांच किया प्रोजेक्ट।
पहाड़ की लोककला को दुनिया तक पहुंचाने की मुहिम।
लोककला को रोजगार से जोडने की अनूठी पहल।
ऑनलाइन दे सकेंगे ऐपण की डिमांड।ऐपण गर्ल मीनाक्षी नें ऐपण को नये कलेवर के रूप में प्रस्तुत किया और पूरे देश में एक नयी पहचान दिलाई। इसी अभिनव पहल को आगे बढ़ाते हुए ऐपण गर्ल नें मीनाकृति- द ऐपण प्रोजेक्ट’ की एक अनूठी सौगात दी है। बकौल मीनाक्षी इस प्रोजेक्ट के माध्यम से पहाड की लोककला ऐपण को रोजगार से जोडने और देश दुनिया तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा लोगों को प्रशिक्षित करके ऐपण को बढ़ावा देना है। आज मीनाक्षी के घर छोई में मीनाक्षी की दादी और माँ नें ऐपण गर्ल के ड्रीम प्रोजेक्ट मीनाकृति- द ऐपण प्रोजेक्ट’ का शुभारंभ किया। सभी लोगों नें मीनाक्षी की कला की तारीफ की।इस अवसर पर छोई के रणजीत सिंह खाती, नमित सिंह खाती, कमला देवी, उच्छब सिंह अधिकारी, शंकर सिंह बिष्ट, पिंकी, बबिता कांडपाल सहित कई लोग उपस्थित रहे।गौरतलब है कि ऐपण गर्ल मीनाक्षी खाती नें कुमाऊं की ऐपण कला को घरों की देहली से देश दुनिया के सामने लाने का अभिनव प्रयास किया है। ऐपण गर्ल की वजह से कई गुमनाम प्रतिभाओं को भी प्रोत्साहन और हौसला मिला है। मीनाक्षी की वजह से एक परिवर्तन देखने को मिला, आज हर रोज पूरे प्रदेश से कोने कोने से दर्जनो ऐपण कला के हुनरमंद भी सामने आ रहें हैं। ये सब ऐपण गर्ल की वजह से हुआ है। ऐपण गर्ल के बाद अब हर जगह ऐपण कला दिखाई दे रही है। जिसका पूरा श्रेय मीनाक्षी खाती की अभिनव पहल को जाता है।


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