Good news for farmers: Agreement for construction of portable polyhouse between VPKAS and Parashar Agrotech
अल्मोड़ा, 24 नवंबर 2023- विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान(VPKAS) ने मैसर्स पाराशर एग्रोटेक बायो प्राइवेट लिमिटेड के साथ ‘वीएल पोर्टेबल पॉलीहाउस’ के निर्माण के लिए समझोते पर हस्ताक्षर किये।
VPKAS संस्थान की ओर से बताया गया है कि इस पॉलीहाउस को आसानी से स्थानांतरित किया जा सकता है।
प्रचलित स्थायी पॉलीहाउस में यदि विशेष सावधानियां ना रखी जाये तो लगातार 4 से 5 वर्षों तक खेती करने के बाद मृदा स्वास्थ्य खराब होने एवं कीट-पतंगों व मृदा जनित बीमारियों में वृद्धि होती है।
जिस कारण उत्पादकता में कमी आती है एवं खेती की लागत बढ़ जाती है। ऐसी स्थितियों में या तो किसान को सतह की मिट्टी को बदलना पड़ता है या फिर स्थायी पॉलीहाउस को किसी नये खेत में ले जाना पड़ता है।
जो बहुत महंगा होता है। इसके अलावा ऊंची पहाड़ियों में बड़े आकार के खेत आसानी से उपलब्ध नही हो पाते और अगर मिल भी जाते है तो या तो वे चौड़ाई में पतले होते हैं अन्यथा लम्बाई में सीधे नहीं होते। दो या दो से अधिक छोटे खेतों को मिलाकर एक खेत बनाने में न केवल अत्यधिक मिट्टी कटाई का कार्य करना पड़ता है, बल्कि लागत को भी बढ़ाता है एवं दो खेतों के बीच ऊर्ध्वाधर ऊंचाई बढ़ जाती है।
इस पोर्टेबल पॉलीहाउस में प्राकृतिक वायु-संचार है और वर्षा जल व ओस को संग्रहण करने का प्रावधान है। इसका उपयोग बहुउद्देशीय है एवं आवश्यकतानुसार सब्जी उगाने, अत्यधिक सर्दी में मछली के तालाबों को ढकने इत्यादि में किया जा सकता है। फसल को खुले में बाहर एक निश्चित अवस्था तक उगाया जा सकता है, बाद में पोर्टेबल पॉलीहाउस को स्थानांतरित किया जा सकता है। इस प्रकार किसान पोर्टेबल पॉलीहाउस का प्रयोग रिले क्रॉपिंग की तरह करके प्रति इकाई समय उत्पादकता बढा सकता है।