उत्तराखंड में कुट्टू के आटे से बने पकवान खाने के बाद बड़ी संख्या में लोगों के बीमार होने की खबर सामने आई है। देहरादून और हरिद्वार में कई लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हरिद्वार के लक्सर क्षेत्र में 18 लोग फूड प्वाइजनिंग का शिकार हुए, जिन्हें अस्पताल में इलाज के लिए ले जाया गया। वहीं, देहरादून में यह संख्या लगभग 150 के पार पहुंच गई, जिससे प्रशासन में हड़कंप मच गया।
हरिद्वार के निरंजनपुर गांव में सुनील और उसके परिवार के अन्य सदस्यों ने व्रत खोलने के बाद कुट्टू के आटे की रोटियां खाईं। थोड़ी देर बाद ही उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। लोगों को चक्कर आने लगे, उल्टी और दस्त की शिकायत होने लगी। इसी तरह खेड़ी कला गांव में भी अभिषेक के परिवार में कई लोगों की हालत खराब हो गई। इन सभी को निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया।
बीमार हुए लोगों में से एक सुनील ने बताया कि उन्होंने गांव के ही एक दुकानदार से कुट्टू का आटा खरीदा था, जिसके खाने के बाद पूरे परिवार की तबीयत खराब हो गई। डॉक्टरों के मुताबिक, यह मामला साफ तौर पर फूड प्वाइजनिंग का है, और सभी मरीजों को उल्टी तथा दस्त जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा।
इस घटना के बाद उत्तराखंड के स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत ने हरिद्वार पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि दोषी दुकानदारों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। खराब आटा बेचने वाले व्यापारियों की दुकानों को सील करने और उनके लाइसेंस रद्द करने के आदेश दिए गए हैं। इसके अलावा, खाद्य विभाग की एक टीम बनाकर हरिद्वार और देहरादून की दुकानों से आटे के सैंपल लिए जा रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह मिलावटी आटा कहां से आया।
देहरादून में भी प्रशासन ने तत्काल कदम उठाए हैं। फूड इंस्पेक्टर ने पुलिस को शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद 22 दुकानों को सील कर दिया गया। पुलिस इस मामले की गहराई से जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि दूषित आटा कहां से सप्लाई किया गया था। बताया जा रहा है कि यह आटा सहारनपुर से मंगवाया गया था, इसलिए देहरादून पुलिस की एक टीम जांच के लिए सहारनपुर भी गई है।
देहरादून जिलाधिकारी ने मरीजों के इलाज की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए सिटी मजिस्ट्रेट और एसडीएम को अस्पतालों की जिम्मेदारी सौंपी है। सिटी मजिस्ट्रेट प्रत्यूष कुमार को दून मेडिकल कॉलेज, एसडीएम कुमकुम जोशी को कोरोनेशन अस्पताल और एसडीएम हर गिरि को महंत इंद्रेश अस्पताल की जिम्मेदारी दी गई है, ताकि मरीजों को समुचित इलाज मिल सके।
यह कोई पहली बार नहीं है जब कुट्टू के आटे के कारण उत्तराखंड में फूड प्वाइजनिंग के मामले सामने आए हैं। इससे पहले, 2024 में हरिद्वार में 122 लोग बीमार हुए थे, 2021 में रुड़की में 45 लोग प्रभावित हुए थे, और 2020 में इसी तरह के कारण 104 लोग अस्पताल पहुंचे थे।
प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे बाजार से कुट्टू और सिंघाड़े का आटा खरीदने से बचें। यदि इनका उपयोग करना आवश्यक हो, तो साबुत अनाज खरीदकर खुद पिसवाकर ही इस्तेमाल करें। साथ ही, यदि किसी भी दुकान पर मिलावट की आशंका हो तो इसकी सूचना तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम या संबंधित अधिकारियों को दें। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि मिलावटखोरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।