आखिर पशुओं के प्रति कैसे निर्मम हो गया अपना अल्मोड़ा, मेले में घंटों लोगों को सवारी करा रहें ऊंटों की बेबसी पर नहीं पड़ी किसी की नजर,वायरल वीडियो कर रहा है हर किसी से सवाल

यहां देखें वायरल वीडियो अल्मोड़ा:- एक कहावत है कि जानवर की ठौर वहीं होती है जहां उसके गले में बंधी रस्सी पकड़ने वाला उसे ले…

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यहां देखें वायरल वीडियो

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रात में भी आराम नहीं –लोगो को सवारी कराता ऊंट

अल्मोड़ा:- एक कहावत है कि जानवर की ठौर वहीं होती है जहां उसके गले में बंधी रस्सी पकड़ने वाला उसे ले जाय, वह उसे चारा चुगाए, पानी पिलाए या बोझ ढुलाए,वह बेजुबान प्रतिकार नहीं कर सकता, हां उसकी डबडबाई आंखे सवाल जरूर करती हैं जिसे हम सुन नहीं सकते लेकिन महसूस ही कर सकते हैं , संवेदनाओं के तारतम्य के बीच अगर व्यवसाय आ जाय तो फिर राम ही मालिक है, अल्मोड़ा जीआईसी में चल रहे मेले में लोगों की सवारी कर उनका मनोरंजन कर रहे मरुभूमि के जहाज की ऐसी ही मनोदशा हो गई है व्यवसाय की आड. में यहां लाए गये दो ऊंटों से 12 घंटे से अधिक काम कराया जा रहा है वह भी पर्वतीय क्षेत्र में रस्सी थामे गाइड व्यवसाय में मस्त है और सवारी करने वाला अपने मनोरंजन में मग्न है, संवेदनाओं के मर्म और मनोरंजन की गर्मी के बीच वह बेजुबान पिस रहा है वह भी तब जब यह शिकायत आ रबी है कि एक जानवर चोटिल है और उसके पांव से खून निकल रहा है|लेकिन उस बेबस जानवर की पीड़ा पर न तो पशुप्रेमियो की नजर पड़ी और न ही आयोजकों की दया दृष्टि, यह सोचने वाला सवाल है कि देर रात तक लोगो को सवारी का आनंद देने वाले यह ऊंट कब आराम करते होंगे, दवा व चारे की कैसी व्यवस्था होगी, इस बीच एक वायरल वीडियो सामने जरूर आया है जिसमें यह सवाल पूछने की हिम्मत की गई है,वीडियो के सामने आने के बाद कई लोग अब ऊंटों की हालत व बेबसी पर प्रश्न कर रहे हैं एक जानवर के पैर में चोट होने की बात भी सामने आई है, लोगों का कहना है कि इस मेले के बाद इन ऊंटो को नैनीताल नंदादेवी मेले में ले जाने की तैयारी है वहां भी यह लोगों का मनोरंजन करेंगे| इसी बीच कुछ लोगों ने इन ऊंटो को तत्काल प्राथमिक उपचार देने व कुछ दिन उनके मालिकों के साथ यहां आराम कराने की मांग की है,अब देखना है कि किसकी संवेदनाएं जागती हैं और कौन पहल करता है, वीडियो बनाने वाले की संवेदना भी सराहनीय है|वीडियो में आए उद्गार सोचने को विवश जरूर करते हैं…..

‘अल्मोड़ा कुमाऊँ महोत्सव में, ऊँट को देखकर इतना अचंभा? मूक बेबस जानवरों के साथ इतना अत्याचार। साहब ये ऊँट ना हुआ,मज़ाक़ हो गया। ‘