चंडीगढ़: दोनों भाई दविंदर सिंह और रविंदर सिंह चंडीगढ़ में रहते थे और यही से पढ़ाई की। इन्हें पुरानी गाड़ियों को फिर से तैयार करने का शौक जागा और एक-एक कर आज इनके कारों के बेड़े में 50 से अधिक गाड़ियां, पुराने बाइक, स्कूटर, विटेंज गाड़ियां, जिप्सी और आर्मी के पुराने वाहन शामिल हैं।
दविंदर सिंह ने बताया जब वह चंडीगढ़ के डीएवी कॉलेज में पढ़ते थे, उस समय शौक के तौर पर एक कांटेसा गाड़ी खरीदी। उसे मॉडिफाई किया। कुछ महीने बाद जब इस गाड़ी को बेचने के लिए ऑनलाइन साइट पर डाला तो मुंबई से किसी ने साइट पर इस गाड़ी को देखा और संपर्क कर इस गाड़ी को फिल्म की शूटिंग के लिए दस दिन के लिए किराए पर लिया। उनकी शूटिंग एक महीने तक चली और उन्होंने इस गाड़ी के लिए अच्छी रकम दी। इसके बाद हमने सोचा कि क्यों न पुरानी गाड़ियों को खरीद कर उन्हें तैयार किया जाए। इसके बाद एक के बाद एक गाड़ियां खरीद कर उन्हें सजाना शुरू कर दिया।
रविंदर सिंह ने बताया बॉलीवुड और पॉलीवुड के जो लोकल लाइन प्रोड्यूसर चंडीगढ़ में रहते हैं, उन्होंने संपर्क करना शुरू किया। चंडीगढ़, शिमला, कुल्लू-मनाली, कूफरी और लेह-लद्दाख में होने वाली फिल्मों की शूटिंग में गाड़ियां किराए पर जाने लगीं। इन गाड़ियों ने ही हमें रोजगार भी दिया है।
1955 मॉडल की फिएट, 1956 की लैंड मास्टर, 1970 मॉडल की मर्सर्डीज, आर्मी के दो व्हीकल, इनमें जोंगा और ट्रैक है जो राजस्थान से खरीदे। मोटरसाइिकल में यैजदी, राजदूत, यामा 800, जावा शामिल हैं। विली जीपें, जिप्सी और पुरानी फिल्मों में दिखाई देने वाली मैटाडोर भी बेड़े में हैं।