रंग ला रहा है पिथौरागढ़ में शिक्षक-पुस्तक आंदोलन

कुंडल सिंह चौहान


छात्रों की समस्या जानने महाविद्यालय पहुंचे जिलाधिकारी


पिथौरागढ़। एलएस महर राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में चल रहा शिक्षक-पुस्तक आंदोलन रंग लाने लगा है। छात्र-छात्राओं के संघर्ष का ही परिणाम है कि बुधवार को जिलाधिकारी पिथौरागढ़ को भी महाविद्यालय में जाकर उनकी समस्याएं जानने को विवश होना पड़ा। इस दौरान जिलाधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने महाविद्यालय प्रशासन की मौजूदगी में आंदोलनरत छात्र-छात्राओं से वार्ता की। इसके बाद जिलाधिकारी ने लाइब्रेरी का निरीक्षण किया और स्वीकृत पदों के सापेक्ष कार्यरत शिक्षकों की जानकारी ली। जिलाधिकारी ने पुस्तकों के लिए अपने स्तर से फिलहाल एक लाख रुपये देने और समस्याओं के उचित समाधान के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन व शासन स्तर पर वार्ता चलने की बात कही। वहीं छात्रों ने समस्याओं का उचित समाधान होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही है।


गौरतलब है कि पिथौरागढ़ महाविद्यालय के छात्र-छात्राएं छात्रसंघ अध्यक्ष राकेश जोशी के नेतृत्व में पिछले करीब तीन सप्ताह से धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। सात हजार से अधिक छात्र संख्या वाले महाविद्यालय में विद्यार्थियों ने पुस्तकालय में उचित और बेहतर किताबें उपलब्ध कराने, शिक्षकों की कमी दूर करने, सब रजिस्ट्रार की नियुक्ति आदि को लेकर महाविद्यालय में धरना शुरू किया। अपनी मांगों को लेकर छात्रों ने शहर में मौन जुलूस निकालने से लेकर कलक्ट्रेट में प्रदर्शन किये। अभिभावकों ने भी छात्रों के समर्थन में प्रदर्शन किया। इस बीच बरसात के दौरान धरनारत कई छात्र-छात्राओं का स्वास्थ्य भी खराब हो गया। इसके बावजूद छात्र-छात्राओं ने शिक्षक-पुस्तक आंदोलन को लगातर जीवित रखा। इसी का नतीजा रहा कि आंदोलन की गूंज प्रदेश और देश के स्तर पर हुई। जिसके बाद गत मंगलवार को विवि प्रशासन ने भी छात्रों की मांगों का संज्ञान लेकर कुमाऊं विश्वविद्यालय का कैंप कार्यालय पिथौरागढ़ में खोलने का निर्णय लिया।

बढ़ते दबाब के बाद ​जिलाधिकारी पहुंचे महाविद्यालय


इधर बुधवार को जिलाधिकारी महाविद्यालय पहुंचे। उन्होंने आंदोलनरत छात्रों से बातचीत के बाद महाविद्यालय की लाइब्रेरी का निरीक्षण किया और प्राचार्य डॉ. डीएस पांगती समेत महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्षों के साथ बैठक की। उन्होंने महाविद्यालय में स्वीकृत 120 पदों के सापेक्ष कार्यरत शिक्षकों की भी जानकारी ली। बैठक के बाद जिलाधिकारी ने बताया कि पुस्तकालय में लगभग 1 लाख 10 हजार किताबें हैं। वह फिलहाल जिला प्रशासन की तरफ से महाविद्यालय प्रशासन को पुस्तकों के लिए एक लाख रुपये की सहायता दे रहे हैं। शासन स्तर से पुस्तकों के लिए पर्याप्त फंड आने के बाद जिसे वापस करना होगा। उन्होंने बताया कि महाविद्यालय में स्वीकृत पदों के सापेक्ष 82 प्रतिशत शिक्षक कार्यरत हैं, जिनमें करीब 67 प्रतिशत नियमित और शेष कॉन्ट्रेक्ट या अस्थाई तौर पर अध्यापन कर रहे हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि विद्यार्थियों की मांगों का उचित समाधान कराने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन तथा निदेशालय स्तर पर प्राचार्य के माध्यम से आवश्वयक कार्यवाही की जा रही है। इसके लिए उन्होंने प्राचार्य से भी बात की।

छात्रों ने कहा समस्याएं पूरी तरह हल न होने तक जारी रहेगा आंदोलन

छात्र संघ अध्यक्ष राकेश जोशी, छात्रा नूतन, अंशिका आदि ने यूजीसी के मानकों के हिसाब से शिक्षकों के पद नहीं भरे जाने सहित अन्य समस्याओं का उचित समाधान होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही है।

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