राष्ट्रीय बाल साहित्य संगोष्ठी प्रारंभ

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नैनीताल । अल्मोड़ा से प्रकाशित बच्चों की त्रैमासिक पत्रिका बाल प्रहरी एवं श्री अरविंदो आश्रम द्वारा वन निवास बारापत्थर में आयोजित राष्ट्रीय बालसाहित्य संगोष्ठी के पहले दिन ‘बच्चे और बाल पत्रिकाएं’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए सत्र के अध्यक्ष डॉ राकेश चक्र ने कहा कि स्कूल के होमवर्क व ट्यूशन संस्कृति के आज के दौर में बच्चों के पास खेलने व पत्र-पत्रिकाएँ पढ़ने का समय ही नहीं है। शहरीकरण व संयुक्त परिवारों के विघटन के कारण बच्चे अब माता-पिता तथा दादा – दादी के प्राकृतिक प्यार से वंचित हैं। शहरीकरण के कारण बच्चे या तो हास्टल में रह रहे हैं या दाई या नौकरानी उनकी देखभाल करती है। भीलवाड़ा से आए बालवाटिका के संपादक डॉ भैरूंलाल गर्ग ने कहा कि इलैक्ट्रानिक मीडिया व स्मार्टफोन के वर्तमान दौर में पढ़ने व पढ़ाने की संस्कृति समाप्त होते जा रही है। बतौर साहित्यकार शिक्षक व अभिभावक हम बड़े लोग नहीं पढ़ रहे हैं इस कारण बच्चों में भी पढ़ने की आदत नहीं है। बीकानेर ने आई संगीता सेठी ने कहा कि देश में प्रतिष्ठित बाल पत्रिकाएं बंद हो चुकी हैं।दैनिक समाचार पत्रों में भी अब रविवारीय परिशिष्ट में बच्चो का कोना ना छपने को चिंता का विषय बताया । नागपुर से आए बालसाहित्यकार हरीशचंद्र बोरकर ने बालसाहित्य व लोकसाहित्य की विवेचना की। बालप्रहरी संपादक तथा संगोष्ठी के मुख्य संयोजक उदय किरौला ने बालसाहित्य तथा बाल पत्रिकाओं के इतिहास को रखते हुए संगोष्ठी की रूपरेखा बताई। श्रीमती अंजू खन्ना ने अरविंदो आश्रम की ओर से सभी का स्वागत करते हुए पहाड़ में बढ़ते डी जे कल्चर पर चिंता करते हुए बच्चों को स्थानीय संस्कृति से जोड़ने की बात कही। इस विषय पर खुले सत्र में डां करुणा पांडेय, कमलेश चौधरी, शशि ओझा, मेजर शक्तिराज, नरेंद्र परिहार आदि ने अपने विचार रखे।
दूसरे सत्र में महाराष्ट्र के वरिष्ठ बालसाहित्यकार श्री हरीशचंद्र बोरकर के सम्मान में आयोजित काव्य गोष्ठी हुई जिसकी अध्यक्षता कोलकाता की डां उषा शा ने की।
में डां सरोज गुप्ता (जयपुर), शंभु सौरभ (मधुबनी), हीरा लाल सहनी (दरभंगा), समसेर कौशल्या (महेन्द्रगढ़), डॉ अशोक गुलशन, श्याम मठपाल (उदयपुर), सुशील सरित (आगरा), , रफीक नागौरी ,करुणा पांडे, चंद्रभान चंद्र, बी डी सिह, देवीप्रसाद पांडेय, दिनेश प्रसाद, शील कौशिक, श्याम मठपाल,इशरत सुल्ताना, अजीत सिंह, चक्रधर शुक्ल, नारारण निखाते, डॉ सुशील सागर, डॉ अशोक गुलशन, तिलकराम अजनबी, पी के प्रचंड, आदि ने कविता पाठ किया । इस सत्र का संचालन विमला जोशी ‘ विभा’ ने किया। इस अवसर पर डॉ राजकिशोर सिंह, एस बी शर्मा,डॉ फतेहसिंह लोढा, अमरेंद्र सिंह, के पी एस अधिकारी, विमला भाटिया, डॉ विनीता राहुरीकर, डॉ उषा यादव, डॉ उषा शा, डॉ सुषमा सिंह आदि उपस्थित थे ।
आज रविवार को ‘मोबाइल, बच्चे और बालसाहित्य’ विषय पर बातचीत होगी। आज बच्चों की अध्यक्षता व संचालन में बाल कवि सम्मेलन आयोजित होगा जिसमें बच्चे स्वरचित कविताएं पढेंगे।

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