साहित्य के शीर्ष आलोचक नामवर सिंह का निधन

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बंधु कुशावर्ती

स्वातन्त्र्योत्तर हिन्दी आलोचना-समीक्षा में निरन्तर अपनी नयी दृष्टि और सशक्त हस्तक्षेप से सशक्त उपस्थिति बनाये रखने वाले हमारे समय के शीर्ष आलोचक नामवर सिंह का कल रात 11.50 पर निधन हो गया। बीती जनवरी में वह अश​कक्तता के अपने घर में गिर पडे़ थे।तब से कुशल चिकित्सकों की देखरेख में उनका सघन इलाज अ.भा. आयुर्विज्ञान संस्थान में हो रहा था। ठीक होकर बेहतर स्थिति में वह घर आ गये थे।महसूस किया जा रहा था कि हमारे समय के इस शलाका-पुरुष का साहचर्य हमें अभी सुलभ रहेगा । किन्तु कल रात उनके निधन से अब हिन्दी- जगत् अपने नामवर आलोचक के कायिक-साहचर्य से कसदैव-सदैव के लिये वंचित हो गया।
नामवर २०वीं सदी में काशी की हिन्दी-मनीषा के प्रतिनिधि व्यक्तित्त्वों मे रहे हैं।काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के अफने अध्ययन-काल में हजा़रीप्रसाद द्विवेदी के वह न केवल प्रिय बल्कि अन्यतमा शिष्य रहे।रामचन्द्र शुक्ल का आलोचना-कर्म ‘हिन्दी आलोचना की पहली परम्परा’ के रूप में स्वयमेव पहचाना गया और प्रतिष्ठित ही इसलिये हो गया क्योंकि हजा़रीप्रसाद द्विवेदी की आलोचना-धारा को नामवर सिंह द्वारा ही ‘आलोचना की दूसरी परम्परा’ के नाम से सायास प्रक्षेपित-प्रतिष्ठापित किया गया!

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